मासिक धर्म पर मानसिकता बदलने की जरूरत

Menstruation
विश्व मासिक धर्म दिवस पर छात्राओं को सेनेट्री नेपकिन वितरित करते डा. सुजाता संजय।
Menstruation पर मानसिकता बदलने की जरूरत

देहरादून। विश्व मासिक धर्म दिवस का मुख्य उद्देश्य समाज को एक स्वस्थ्य संदेश देना है कि हमारी मां, बहनें व बेटियां कैसे स्वच्छ और स्वस्थ्य रहें। क्योंकि एक स्वस्थ्य महिला ही रहकर एक स्वस्थ समाज का निमार्ण कर सकती है। इस स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक महत्वपूर्ण कदम है मासिक धर्म ( Menstruation ) के दौरान स्वच्छता।

विश्व मासिक धर्म दिवस के अवसर पर सोसायटी फाॅर हैल्थ एजुकेशन एंड वूमैन इम्पावरमेन्ट ऐवेरनेस सेवा द्वारा देहरादून के विभिन्न स्कूलों एवं काॅलेजों के शिक्षण संस्थानों में जाकर बालिकाओं को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता हेतु 480 से भी अधिक छात्राओं एवं शिक्षिकाओं को जागरूक किया गया तथा 180 छात्राओं को सेनेट्री नेपकिन वितरित किये गये। इसके साथ ही मासिक धर्म की प्रक्रिया के दौरान ध्यान रखी जाने वाली स्वच्छता एवं बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं के बारे में जागरूक किया गया।

संजय आॅर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ. सुजाता संजय का मासिक धर्म दिवस में बालिकाओं को जागरूक करने का एक लक्ष्य माना जा सकता है कि उनके द्वारा किसी भी तरीके से बालिकाओं एवं किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के बारे में जागरूक करने की ठानी है। इसी लक्ष्य को लेकर 100 अचीवर्स आॅफ इंडिया राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ0 सुजाता संजय, डाॅ. प्रतीक एवं उनकी टीम द्वारा शहर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में जाकर व्याख्यानों का आयोजन किया गया।

Menstruation के संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए

इस स्वच्छता अभियान के अंर्तगत देहरादून के स्वामी रामतीर्थ कन्या विद्यालय़, साई पैरामेडिकल स्कूल आॅफ नर्सिंग, राजकीय इंटर काॅलेज, किशनपुर, आई.एल. एंड एफ.एस. स्किल स्कूल, बालावाला आदि में इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ. सुजाता संजय ने बताया कि मासिक धर्म एक प्रक्रिया है, जो महिलाओें में 20 से 30 दिन पर आती है। जो 4 से 5 दिनों तक रहता है। हर लड़कियां जब 11 से 12 साल की होती है, तो उस समय इस चक्र के शुरूआत होने का समय आता है।




यही समय है जब लड़कियों को इस संबंध में उचित सलाह देकर जागरूक किया जाए। परिणामस्वरूप वे मासिक चक्र के दौरान स्वच्छता बनाए रहे। इस जागरूकता में सबसे बड़ी भागदारी उस घर की मां, बड़ी बहन एवं स्कूल की शिक्षिकाओं की होती है। मासिक के समय कैसे रहा जाए। क्या उपयोग किया जाए और क्या नहीं किया जाए। इन सब के प्रति सतर्क एवं सजग करना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

इस संबंध में खुलकर आपस में बात होनी चाहिए और हम स्त्री रोग चिकित्सक का दायित्व है। मासिक धर्म के समय स्वच्छता बनाए रखे। मासिक के दौरान हमेशा सेनेट्री नेपकिन या साफ कपड़ा का उपयोग करें। दिन में दो बार बदले। उस कपड़े का दूबारा उपयोग ना करें। स्वच्छता नहीं रखने से उस दौरान बहुत सारा इन्फेक्शन/संक्रमण लगने का भय रहता है। जिससे पीआईडी और बच्चेदानी के नली और अंदरूनी भाग को छतिग्रस्त करता है।

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महिलाएं बांझपन का शिकार हो सकती है और उन्हें संतान सुख से वंचित होने का भी डर रहता है। कार्यक्रम के दौरान आई.एफ. एंड एफ.एस. स्किल स्कूल उत्तराखंड की काॅडिनेटर फरीन अंसारी, चारू चोपड़ा, सेवा सोसाइटी के सदस्य सोनिया, नीतू, सुषमा, दुर्गा आदि मौजूद थे।